अँधेरा चाहे कितना भी घना हो रोशनी के लिए एक चिराग जलाना ही काफी है

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अँधेरा चाहे कितना भी घना हो रोशनी के लिए एक चिराग जलाना ही काफी है

संघर्ष का सफर चाहे कितनी भी चुनौतियों से भरा हो

मंज़िल की तरफ पहला कदम बढ़ाना ही ज़रूरी होता है

अगर सफर का आगाज़ किया है तूने तो फिर पीछे मत हट जाना

जिंदगी एक जंग और मैदान में तू भी जम कर डट जाना

क्या है इन मुश्किलों का कब तक ये तुझको सताएंगी

होंसला रख कि दिन ये मुश्किलें भी तुझसे हार मान लेंगी

ये वक़्त बहुत बड़ी चीज़ है साहब ये तो सबकी परीक्षा लेता है

अगर तुझे कामयाब होना है तो मुश्किल हालात को अपना साथी बना

जिस दिन तू अपने पैरों पर खड़ा होकर हर तूफान से टकराएगा

उस दिन तेरी कामयाबी का परचम चारों तरफ लहराएगा

जिंदगी ना मिलेगी दोबारा कर ले बन्दे अब तू हर मैदान फतह

तेरे चारों तरफ जो लोग आज तुझे देखना भी नहीं चाहते

यही लोग कल मिलेंगे तुझसे समय मांगकर अगर तू चाहे

दुनिया भी हमेशा चढ़ते सूरज को ही सलाम करती है

कब तक भटकता रहेगा यूँ ही तू किसी आशियाने की तलाश में

छोटा ही सही कहीं पर रहने को एक ही ठिकाना काफी है

अंधकार चाहे कितना भी घना हो रोशनी के लिए एक चिराग जलाना ही काफी है