
अगर तुम करते रहे किसी की नौकरी यूँ ही, तो कभी ना बनोगे मालिक
तरसते रहोगे एक-एक पैसे के लिए और अपनी हर इच्छा को दबा दोगे
कभी सोचा है कि मालिक और नौकर में क्या फर्क होता है
नौकरी जल्दी संतुष्ट हो जाता है और मालिक हमेशा आगे बढ़ता है
आखिर कब तुम अपने परिवार को उनकी खुशियां दोगे
ये ज़िन्दगी बीत जाएगी यूँ ही फ़िज़ूल की बातों में और फिर तुम पछताओगे
यही मुनासिब होगा कि कुछ करने की ठान लो नहीं तो हाथ मलते रह जाओगे
ना होगा तुम्हारे पास कभी बांग्ला, गाड़ी, नौकर और चाकर
अगर तुम यूँ ही पड़े रहोगे नौकरी के चक्कर में रहकर
कब तक मालिक को इम्प्रेस करने के चक्कर में पड़े रहोगे
बाहर निकलो अपनी छोटी मानसिकता से और छा जाओ इस दुनिया पर
तुम्हे भी भगवान् ने पैदा किया है राजा की तरह जीने के लिए
खा लो आज ये कसम कि अब ना पीछे मुड़कर देखोगे
छोड़ दो आज से ये दो कौड़ी की नौकरी, और बन जाओ जल्दी से मालिक
अगर तुम करते रहे किसी की नौकरी यूँ ही, तो कभी ना बनोगे मालिक
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