अगर मेरी महबूबा आज मुझसे रूठी है तो कल मान भी जाएगी
तेरे इस मायूस चेहरे पे फिर से एक प्यारी सी मुस्कान आ जाएगी
चलते-चलते इस जिंदगी में सब कुछ होता है मेरे दोस्त
कोई किसी को पाता है तो कोई किसी को खोता है ऐ दोस्त
अब कौन हिसाब रखे आने-जाने वालों का इस दुनिया में

लाखों की भीड़ में मुश्किल है अपनों को खोज पाना
बरसों से है इंतज़ार पर ना जाने कब इस दिल का करार आएगा
ना जाने कब तेरे दिल को इस दीवाने पर प्यार आएगा
रात-रात भर जागकर मैंने तेरे ख्याल को ज़िंदा रखा है
जब तुम मिलोगे को तुमको अपना हाल-ऐ-दिल सुनाएँगे हम
तेरी हसीन अदाओं पर अपना ये दिल लुटाएँगे हम
आज फिर से इस मिटटी में बारिश की खुश्बू है
ये खुश्बू मुझे तेरे प्यार की याद दिलाती है

पिछले सावन में हम साथ-साथ बैठे थे हाथों में हाथ लेकर
इस बार का सावन तेरे बिना कुछ सूखा-सूखा सा है
तेरा मिलना और फिर मिलकर बिछुड़ना मुझे बहुत तड़पाता है
पाता नहीं मेरी ये एकतरफा मोहब्बत क्या रंग लाएगी
अगर मेरी महबूबा आज मुझसे रूठी है तो कल मान भी जाएगी
मुझे है ये उम्मीद की एक दिन मेरी प्रेमिका मेरे पास ज़रूर आएगी
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