आजा आज ज़िन्दगी का स्वाद चख़ ले तूँ फिर से एक बार
फेंक दे खुद को तूँ समंदर की उफनती लहरों के बीच में
सच कहता हूँ कि कुछ नहीं बिगड़ेगा तेरा
ये समंदर तुझसे तेरे इरादे तो नहीं छिन सकता
चल रही है ये दुनिया चंद लोगो के भरोसे ही

बहुत से तो बस गुलाम हैं अपनी फितरत के ही
रोज़ घर से जब निकलो तो शुक्रिया कहना रब को
अभी तक ज़िंदा हो तो उम्मीद भी अभी बाकी है
क्या सोचता है कुछ तो दाँव पर लगा ले
ये सपनें तेरे यूँ ही हक़ीक़त नहीं बनेंगे
माँगती है हर पल तुझसे पसीना तेरी ये मेहनत

तब कहीं जाकर मिलती है मंज़िल राही को
तूँ नहीं तेरा काम ही बोलना चाहिए इस जग में
लोगों का क्या है चुप हो जायेंगे अपनी कहकर
अब तेरी बारी है खुद को साबित कर दे
अपनी कोशिश में फिर से तू एक नयी उड़ान भर दे
सब होगा हाँसिल बस तू सोच ले एक बार
आजा आज ज़िन्दगी का स्वाद चख़ ले तूँ फिर से एक बार
Amazon Link to Buy Book:
