आजा तेरी बिखरी हुई जुल्फों को मैं प्यार से सुलझा दूँ
तूने कहा था एक रोज़ मैं आउंगी पर तू ना आई
तूँ तो नहीं आई पर तेरी याद मुझको हर वक़्त आई
तेरे नशीले नैन हर वक़्त मुझे मदहोश रखते हैं
मुझे कभी नहीं था पीने का शौक मेरे दोस्त
कल की ही तो बात थी कि बड़े ही मुस्कुरा कर मिले थे आप हमसे
और आज ऐसे मिल रहे हो जैसे जानते ही नहीं

कब तक तुम मुझको नहीं चाहोगे ये देखते है
क्या मुझे प्यार हो गया है
ये पूछता फिरता हूँ मैं आजकल दोस्तों से
पत्थर के इन रास्तों पर चलते हुए मैं ढूंढता हूँ फूलों को
जब भी दिल हमारे मिलेंगे तो तुझे बताऊंगा मैं किस्से हमारी चाहत के
तुम क्यों हर वक़्त चले आते हो मुझको सताने के लिए
तूँ हर वक़्त मेरे ख्वाबो में आकर मुझे तड़पाता है
सोचता हूँ आज तेरी आँखों को अपनी आँखों में आज मैं सुला दूँ
आजा तेरी बिखरी हुई जुल्फों को मैं प्यार से सुलझा दूँ
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