You are currently viewing आज तुझसे मिलकर कुछ अपना सा लगा

आज तुझसे मिलकर कुछ अपना सा लगा

आज तुझसे मिलकर कुछ अपना सा लगा

तेरी चाहतें अब मुझे बेताब कर रही हैं

दिल करता हैं ले चलूँ तुझे इस दुनिया से दूर कहीं

छुपा लूँ तुझे अपनी आंखों में और आँखें बंद कर लूँ

यूँ ही तुम मुझसे बात करती हो या इश्क़ है मुझसे

कभी तो अपना राज़ ऐ दिल खोल दो

दो मीठे बोल प्यार के कभी तो बोल दो

तेरी आशिकी मेरे सर चढ़ कर बोल रही है

तेरे पहलू में सिर रखकर सोना चाहता हूँ

तेरे मेरे सपने अब रातों को चार चाँद लगा रहे हैं

क्या तुम भी जागती हो चाँद रातो में मेरी तरह

पहले पहले प्यार का ये कैसा एहसास है

लब हैं खामोश मगर दिल में प्यास है

आज तुझसे मिलकर कुछ अपना सा लगा