
आज नौकरानी नहीं आई, पता नहीं कैसे मिलेगा खाना मेरे भाई
बहुत दिनों से सोचा कि कुछ इस पर भी लिख दूँ
कि नौकरानी से ही अब घरों का चूल्हा जलता
मिया-बीवी दोनों करतें हैं अब काम
दोनों करते हैं दिन-रात मेहनत, नहीं मिलता उनको थोड़ा सा भी आराम
ऐसे में अब कौन किसको खाना बना कर खिलाये
सोचते हैं कि कोई हमको भी खाना बना कर खिला जाए
हमने भी अपने घर में एक नौकरानी रख ली
कुछ दिनों तक उसने की अच्छे से सेवा और खिलाया बढ़िया खाना
उसके बाद धीरे-धीरे उसने अपना असली रंग दिखाया
हर रोज़ छुट्टी मारने का था उसका एक नया बहाना
दिन-रात हम सोचते थे कि अब मुश्किल है इसका टिक पाना
और फिर एक दिन उसने चुपके से छोड़ दिया हमारा काम
बर्तन भी खुद किये हैं साफ़ और अभी पोछा भी लगाना है मेरे भाई
आज नौकरानी नहीं आई, पता नहीं कैसे मिलेगा खाना मेरे भाई
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