आज हम तेरी महफ़िल को छोड़ कर कहीं दूर चले जायेंगे

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आज हम तेरी महफ़िल को छोड़ कर कहीं दूर चले जायेंगे

ये जो शान और शौकत जिसमे तुम रहती हो मैं इसके काबिल नहीं

बहुत बड़ी है तुम्हारे इन महलों की दीवारें शायद हमारे इश्क़ से भी ऊँची

मेरी मासूम मोहब्बत इन दीवारों के पीछे कहीं क़ैद होकर रह गयी है

जब कभी मोहब्बत में अमीर और गरीब के दिल आपस में टकराते है

तो बेचारा आशिक़ तो बस आहें भरने के लिए ही अकेला रह जाता है

जब कभी याद करता हूँ अपनी मोहब्बत को तो आँखें भर जाती हैं

पर क्या करूँ मैं इस ज़माने से नहीं टकरा सकता

तूने एक दिन ये कहा था कि हम ना बिछड़ेंगे अब कभी

और ये भी फ़रमाया था कि जनम जनम का साथ है हमारा तुम्हारा

आज तुम मुझे छोड़ कर किसी गैर की बाहों में रहती हो

मैं कैसे भुला दूँ वो प्यार भरे रात और दिन जो हमने एक साथ बिताये थे

इस तनहा दिल के पास तो तेरी यादों के सिवा कुछ भी नहीं

सोचा था कि हम मिलकर एक प्यार भरी नयी दुनिया बसायेंगे

ऐसी दुनिया जिसमे छोटा बड़ा कोई ना हो बस प्यार ही प्यार पले

पर आज लोग हंस रहे है मुझ पर और मेरी नाकाम मोहब्बत पर

हमने ये सोचा ना था कि ज़माने में यूँ मशहूर हम हो जायेंगे

आज हम तेरी महफ़िल को छोड़ कर कहीं दूर चले जायेंगे