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इश्क़ जब भी हद से गुजरता है तो दर्द बन जाता है

इश्क़ जब भी हद से गुजरता है तो दर्द बन जाता है

ये तो मुमकिन ही नहीं कि हर मोहब्बत अपने अंजाम तक पहुंचे

ऐसे तो लाखों आशिक़ है जो तलाश कर रहे हैं अपनी महबूबा की

हर दीवाने को उसकी हमसफ़र मिले ये ज़रूरी तो नहीं

ऐसी बहुत सी मोहब्बत है ज़माने में जो अधूरी रह गयी

हर इश्क़ का अफसाना बने ये कोई ज़रूरी तो नहीं

ना जाने क्यों लोग मोहब्बत करते हैं किसी से

ये तो एक आग का दरिया है और डूब के ही जाना है

हर एक तूफ़ान को साहिल मिल जाए ये कोई ज़रूरी तो नहीं

जब भी आशिक़ कोई नाकाम होता है तो टूट जाता है

वक़्त और हालात मिलकर उसपर बहुत जुल्म ढाते है

सोचा था कि ज़िन्दगी तेरे प्यार की ठंडी छाँव में गुजरेगी

पर हर हसीन चेहरे के साथ एक खूबसूरत दिल भी हो ये ज़रूरी तो नहीं

हमने तो तेरे नाम ही कर दी थी अपनी ये ज़िन्दगी

पर तूने तो ठुकरा दिया मेरा ये प्यार भरा दिल

जब तेरे दिल पर ज़ख्म लगे हो तो कोई तुम्हारा हमदर्द नहीं आता है

इश्क़ जब भी हद से गुजरता है तो दर्द बन जाता है