इस भाग दौड़ से भरी ज़िन्दगी में कुछ फुर्सत के पल ढूंढ़ता हूँ
कहीं खो गए हैं जो वक़्त की आंधी में वो मेरे कल ढूंढ़ता हूँ
ये वो कल है जो बीत गया है ज़िन्दगी में देखते ही देखते
कल ही की तो बात थी कि जीवन बचपन की तरह मासूम था
आज वक़्त मुझे तज़ुर्बा देकर मेरी मासूमियत ले गया
खैर आगे बढ़ने के लिए ये तज़ुर्बा भी मेरे बहुत काम आया
क़ामयाबी तो आज मैंने पा ली है बहुत सी
पर मैं वो बिछड़े हुए दोस्त और पुरानी यादें ढूंढ़ता हूँ
चलते चलते कब बचपन और जवानी बीत गए पता ही ना चला
आज में वो बचपन की साइकिल और वो मेले ढूंढ़ता हूँ
यूँ तो धन दौलत भी बहुत कमा ली पर दिल में सुक़ून की कमी है
मैं आज फिर से वो चार आने का जेबख़र्च ढूंढ़ता हूँ
बचपन की वो बेफ़िक्री और यारों का साथ अब कहाँ
पर ये सब पुरानी यादें आज भी मेरे चेहरे पर मुस्कराहट लाती हैं
इस भाग दौड़ से भरी ज़िन्दगी में कुछ फुर्सत के पल ढूंढ़ता हूँ
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