
एक अजीब सा सुकून आजकल इस दिल में है
पहली बार इस दुनिया की दौड़-भाग से फुर्सत ली है
दोस्तों जब भी कुछ वक़्त अपने लिए निकालने की कोशिश की
तो बस फिर क्या था लोगों ने मुझे स्वार्थी बता दिया
जब तक दूसरों के काम का था, तब तक तो मैं बहुत अच्छा था
आज कुछ पल जिंदगी खुद के लिए क्या जी ली
लोगों की नज़र में तो जैसे एक गुनाह कर दिया
कहाँ थे ये लोग जब तड़पा था मैं रातों को जागकर
अपना पेट भरने की खातिर दिन-रात काम करता था
मेरे बुरे वक़्त में लोगों ने बस मुझे सलाह दी साथ नहीं
धीरे-धीरे समझ आया कि मेरे साथ कभी कोई नहीं था
आज की इस दुनिया में कोई किसी का नहीं दोस्तों
क्यों व्यर्थ अपना समय बर्बाद करते हो
ले लो मौज़ और जी लो अपनी ज़िन्दगी
ये घर, जमीन जायदाद और ये दौलत यहीं पर छूट जाएगा
फिर जब एक दिन चुपके से बुढ़ापा दस्तक देगा तो बस फिर
तुम एक दिन बहुत ही ज्यादा पछताओगे
जहाँ पहले हर तरफ तुम्हारा सिक्का चलता था
आज किसी और का नाम गूंजता इस महफ़िल में है
एक अजीब सा सुकून आजकल इस दिल में है




