एक और गीत मोहब्बत का गा लूँ तो चलूँ 

Posted by

–

एक और गीत मोहब्बत का गा लूँ तो चलूँ 

तुम्हे एक बार फिर से अपना बना लूँ तो चलूँ

मंज़िल तो मिल जाएगी भटक कर ही सही

इन अनजान राहों पर अपनी पहचान बना लूँ तो चलूँ

मेरे जैसे तो लाखों होंगे इस जहान में

पर तुझ पर अपने सभी अरमान लुटा लूँ तो चलूँ

आया तो था मैं भी दिल अपना लेकर तेरे लिए

ज़रा दूसरों से भी एक बार नज़रे बचा लूँ तो चलूँ

कभी हाँ कभी ना में ही ना बीत जाये ये ज़िन्दगी यूँ ही

कभी तो तेरे किये वादों से अपना दिल बहला लूँ तो चलूँ

फिर मत कहना की पुकारा नहीं मैंने तुझको

ज़रा एक बार फिर तुझको अपनी पुकार सुना लूँ तो चलूँ

एक और गीत मोहब्बत का गा लूँ तो चलूँ