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एक चंचल शोख़ हसीना से आज कुछ यूँ मुलाकात हो गयी

एक चंचल शोख़ हसीना से आज कुछ यूँ मुलाकात हो गयी

कि मेरे प्यासे दिल पर प्यार की बरसात हो गयी

घायल कर डाला उसने मुझे अपने हुसन की अदाओं से

मेरे पास बच निकलने का कोई भी रास्ता नही था

ना जाने हसीनों की ये अदाएं कौन देता है

अगर अदा दी तो फिर एक नाज़ुक दिल भी दिया होता

मेरे जैसा आशिक़ कुछ दिन और जी लिया होता

तेरे नैनों का काजल आज कुछ ज्यादा ही गहरा है

शायद ये काली घटाएँ आज मेरे घर की तरफ ही आ रही हैं

कभी पीला तो कभी सुर्ख़ लाल फूल भेजता हूँ तुझको मैं

बता देना कि कौन सा रंग जचता है तुम पर

तेरी जुल्फें आज इन मस्त हवाओं में उड़ रही हैं ऐसे

जैसे कि मेरे दिल पर डोरे डालना चाहतीं हो  

आशिक़ तो वैसे भी हर पल अपने महबूब की ख़ैर माँगते हैं

तुम्हारा इरादा क्या है सनम हम तो तेरी राहों में दिल थाम के बैठे हैं

ना जाने हमारी ये मुलाकात कब अपने अंजाम तक पहुँचेगी

मेरा ये कहना है कि ठहर जाओ उम्र भर के लिए मेरे पास

मेरी इस आम सी जिंदगी को बना दो तुम थोड़ा सा तो ख़ास

कल तक तो बंजर पड़ी थी मेरे दिल की ये जमीन

आज तेरा आँचल लहराया और बस बरसात हो गयी

एक चंचल शोख़ हसीना से आज कुछ यूँ मुलाकात हो गयी