एक बार फिर क़ोशिश करके देखता हूँ कि मैं तुझे भूल पाउँगा या नहीं
पर जब भी मैंने तुमको भुलाने की क़ोशिश की है दिल से
तो पहले से भी ज्यादा तेरी याद आयी है मेरे महबूब
चाँद, सितारे, नदियाँ और पर्वत सभी मेरे प्यार के गवाह हैं
मैंने तुझे ढूंढने की ख़ातिर पूरी कायनात की ख़ाक छानी है
जब भी ये ठंडी हवा चलती है तो मेरे जख्मों का दर्द बढ़ाती है
तेरे प्यार का वो कोमल एहसास आज कहीं खो सा गया है
जब हम दोनों एक दूजे के साथ रात भर बातें किया करते थे
तो ना जाने कब सुबह हो जाती थी पता भी नहीं चलता था
अपने दिल का हाल मैं सारा तुझे सुनाता था अपना समझकर
तुमने भी मेरा हर हाल में ख्याल रखने की कसम खाई थी
हमारे प्यार का सफर कट रहा था बड़ी मस्ती से
पर शायद किस्मत को तो कुछ और ही मंज़ूर था
तुझे उस दिन मुझसे मिलने आना तो ज़रूर था
तुम तो नहीं आये पर तुम्हारा भेजा ख़त मुझे मिला था
उस ख़त में तुमने मुझसे कहा था कि हम अब ना मिल पाएंगे कभी
ये पढ़ते ही मेरे प्यार भरे दिल के टुकड़े हज़ार हुए
तब से लेकर आजतक ये पतझड़ और सावन एक जैसे हैं मेरे लिए
वैसे तो सावन के इस मौसम में झूले लगे हैं चारों तरफ
पर तेरे बिना ये सावन के झूले मैं झूल पाउँगा या नहीं
एक बार फिर क़ोशिश करके देखता हूँ कि मैं तुझे भूल पाउँगा या नहीं
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