ऐ यार सुन ज़िन्दगी के इम्तिहान और भी बाकी हैं
सुना है कि घबऱा गए हो तुम लोगों की बातों से
ये वही लोग हैं जो ना चैन से जीने देते हैं और ना मरने
हमारे इश्क़ का सफर दोनों ने एक साथ शुरू किया था

तुम छोड़ गए मुझको और मैं फिर भी चलता रहा
ये सोच कर कि शायद तुम मिल जाओ किसी मोड़ पर
मौसम की तरह से तुम भी अब बदले बदले से लगते हो
मैंने सीखा नहीं अब तक तेरे बिना जीना
पर तुम तो अब किसी और के हो गए हो
अगर मैं ज़िक्र कर दूँ तुम्हारे नाम का ज़माने में

तो मोहब्बत हमारी बदनाम हो जाएगी
फिर सोचता हूँ की चलो तुम तो खुश हो अपनी दुनिया में
तुम्हारे लिए शहनाई तो मेरे लिए श्मशान बाकी है
ऐ यार सुन ज़िन्दगी के इम्तिहान और भी बाकी हैं
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