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कभी कभी ख़ामोशी भी दिल की जुबान बन जाती है

कभी कभी ख़ामोशी भी दिल की जुबान बन जाती है

कहना तो था तुमसे बहुत कुछ पर कह न सका

दर्द ऐ जुदाई मेरे दिल को रात दिन तड़पाता रहा

सोचा था कि तुम साथ दोगी मेरा हर मुश्किल हालात में

पर तुम तो मुझे अपने हाल पर छोड़ कर चली गयी

एक बार भी नहीं सोचा तुमने कि मेरा क्या होगा

जुदाई का ये वक़्त मैं कैसे काटूँगा तेरे बगैर

तेरा पता लगाने की कोशिश भी की है मैंने

पर तुम मुझे कहीं न मिले और ना तुम्हारी खबर ही मिली

ख़ैर तुम जहाँ भी रहो खुश रहो ये दुआ है मेरी

मेरा क्या है मैं तो किसी भी तरह ये ज़िन्दगी जी लूँगा

तेरी यादों का सिलसिला कभी खत्म नहीं होता

रह रह कर मेरी आँखें तेरी याद में भर आती हैं

पर क्या करूँ किससे कहूँ मैं अपना हाल ऐ दिल

कभी कभी ख़ामोशी भी दिल की जुबान बन जाती है