कभी जो थे हमारे महबूब सनम वो हमसे जुदा हो गए देखते देखते

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कभी जो थे हमारे महबूब सनम वो हमसे जुदा हो गए देखते देखते

ये ज़िन्दगी कभी गुजरती थी जिनकी बाहों में इत्मीनान से

वो आज किसी गैर का नाम अपने दिल पर लिख रहे हैं

जिनसे मिलने की ख़ातिर हमने ज़माने भर से बग़ावत की 

वो आज किसी और से मिलने का इंतज़ार कर रहे हैं

रास नहीं आयी मेरी वफ़ा और मोहब्बत उनको शायद

तभी तो मेरा प्यार भरा दिल तोड़ कर वो मुस्कुरा रहे हैं

ख़ैर ये जो भी हुआ एक दिन तो होना ही था

जब तुम वफ़ा नहीं कर सकते तो तुमको मुझसे जुदा होना ही था

यूँ भी कोई हरजाई होता है कभी अक्सर मैं ये सोचता हूँ

शायद ये मेरी नाकाम मोहब्बत का अंजाम है

याद में तेरी जाग कर अब ये रातें मेरी कटती हैं

ना जाने किस ख़ता कि ये सजा मुझे मिली है

मैंने तो बस तुझसे सच्चा प्यार ही किया था

तुम्हे भी तोड़ने को क्या मेरा दिल ही मिला था

कभी जो तड़पते थे मुझसे मिलने को

आज उन्होंने अपना पता भी बदल लिया है

अब मेरा पता ये है कि इश्क़ में लापता हूँ मैं

जो वादे तुमने किये थे मुझसे कभी वो हवा हो गए देखते देखते

तुम पहले थे मेरे महबूब आज क्या से क्या हो गए देखते देखते

कभी जो थे हमारे महबूब सनम वो हमसे जुदा हो गए देखते देखते