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करूँगा आज मैं दिल की बातें खुलकर सबके साथ

करूँगा आज मैं दिल की बातें खुलकर सबके साथ

नहीं छिपाऊँगा कुछ भी किसी से आज

आजकल लोग खुलकर कहाँ मिलते हैं

लोगों के घरों के दरवाजे रहते हैं बंद दिन में भी

किसी भी मेहमान के लिए आना नहीं है मुमकिन

ना ही कोई गुजार सकता है कुछ पल किसी के यहाँ

कितना मसरूफ़ हो गए हैं सभी लोग आजकल

नहीं है वक़्त किसी के पास ना तो खुद के लिए यहाँ पर

और ना ही किसी मुसाफिर के लिए समय है किसी के पास

किस के भरोसे अब मुसाफिर अपना गुजारा करेंगे कहाँ रुकेंगे

उनके लिए कोई ऐसा घर ना बचा जहाँ रात को ठहरा जा सके

कल रात एक कली भी आयी थी ख्वाब में

मुझसे अपना इज़हार ऐ मोहब्बत करने को

मैंने उनसे कहा कि तुम गलत पते पर आ गयी हो शायद

मैं तो काँटों की सेज़ पर ही सोता हूँ

तुम तो फूलों की खरीदार नज़र आती हो

थाम लो किसी और का दामन छोड़ कर मेरा हाथ

करूँगा आज मैं दिल की बातें खुलकर सबके साथ