कर लो खुद से ये वादा कि चाहे जो हो जाये, मुझे अब बस आगे ही बढ़ते जाना है
कब तक यूँ ही क़ैद रहोगे तुम इस पछतावे की अँधेरी कोठड़ी में
जो भी हुआ उसे भूल जाओ और एक नयी शुरुआत करो इस ज़िन्दगी में
क्या हुआ अगर तुम्हारी उम्मीदों का मकान एक बार ढह गया
तुम अगर चाहो तो एक नया आशियाना बना सकते हो
किसी के भी भरोसे मत रहना अगर तुम्हे जीवन में कुछ बड़ा करना हो
ये हालात तुम्हारे अपने हैं, तुम्हे खुद ही इन हालातों को बदलना है
चाहे तुम्हारे ये पैर लहूलुहान हो जाएं इन काँटों भरे रास्तों पर
पर एक भी पल ना तो तुम्हे रुकना है और ना ही उफ़ भी करनी है
कोई नहीं है और किसका रस्ता देख रहे हो तुम
तुम्हारा बेड़ा पार लगाने के लिए कोई अवतार नहीं आएगा
अगर तूँ अब भी ना संभला तो फिर जीवन भर पछतायेगा
अपनी नांव को छोड़ दे तूँ समंदर में, पानी के बहाव के साथ ही बहते जाना है
कर लो खुद से ये वादा कि चाहे जो हो जाये, मुझे अब बस आगे ही बढ़ते जाना है

अपनी जिद को एक बार फिर से तुझे ज़िंदा करना होगा
अगर तुझे मंज़िल को पाना है तो फिर हर हद से गुजरना होगा
इस सफर की शुरुआत तो अब हो ही चुकी है, पीछे मुड़ कर देखना बेकार है
कह दो कि अब तुम्हे जीवन का हर प्रहार हंस कर स्वीकार है
अपनी खोई हुई उम्मीदों का पता लगाकर उनको एक नया नाम दे दो
क्यों बैठे हो यूँ ही बेकार, अपने इन खाली हाथों को एक नया काम दे दो
अपना हो या पराया, ये ज़िन्दगी तो सभी का इम्तिहान लेती है
ये फूटी किस्मत भी चमका देती है मुक्कदर, जब कुछ करने का ठान लेती है
चाहे रहो तुम पास इस कामयाबी के, या फिर रहो तुम इससे दूर
जिसने भी भी इसको पा लिया, वही हो गया ज़माने में मशहूर
कहाँ गए वो लोग जो ये कहते हैं कि मैं तो बस पल दो पल को शायर हूँ
जो ये सोचते हैं कि मेरी कहानी तो अब ख़तम हो गयी
वो ये नहीं जानते शायद कि अभी तो मैंने ज़िन्दगी की किताब का पहला पन्ना लिखा है
ज़िन्दगी के किसी मोड़ पर तुम थक कर रुक मत जाना
कुछ देर के लिए बेशक ठहरना, पर फिर उसके बाद आगे कदम बढ़ाना
क्या कहूं मैं कि किस कठिन दौर से गुजर रहा हूँ, ना कोई उम्मीद है और ना कोई ठिकाना
जिस मंज़िल की तलाश में निकला था मैं घर से, वहां पहुँच कर भी मुझे किसी ने ना पहचाना है
कर लो खुद से ये वादा कि चाहे जो हो जाये, मुझे अब बस आगे ही बढ़ते जाना है

ज़िन्दगी का असली मज़ा तो बस सफर में ही है, मंज़िल में पहुँचने पर नहीं
क्यूंकि लोग तो अक्सर सफर में ही मिलते हैं, शिखर तक तो हर कोई पहुँचता नहीं
कहानी किस्मत की भी बहुत ही अजीब होती है, अक्सर हाथ से फिसल जाती मंज़िल जब करीब होती है
किसका रस्ता देख रहा तूँ इस बेगाने से शहर में, यहाँ पर चंद अपने लोग भी देखकर मुँह फेर लेते हैं
तुम सो जाओ अपने मखमली बिस्तर पर आराम से, मुझे तो मिली कांटो भरी शैया है
तुम्हारी आँखों में आ जाएं शायद कुछ गुलाबी से ख्वाब, मेरी तो डोल रही जीवन नैया है
आज अगर तेरे रास्ते में आ जाएं अगर ऊँचे-ऊँचे पहाड़, तो भी तूँ ज़रा सा भी घबराना नहीं
ये ऊंचाई और गहराई भरे रास्ते लेंगे तेरा इम्तहान, तूँ बस मुस्कुरा देना पर शरमाना नहीं
जब कभी हो जायेगा तूँ चोटिल अपने इस मुसीबतों से भरे सफर में
तो अपने हाथों से ही तुम अपने ज़ख्मों पर मरहम लगा लेना
अगर ना मिले कामयाबी तो फिर अपने होंसलो का परचम लहरा लेना
अभी तो बैठा हूँ मैं एक अकेले से कमरे के कोने में और छत की तरह देख रहा हूँ
दूर-दूर तक भी किसी के आने की कोई आहट नहीं, बहुत अकेला महसूस कर रहा हूँ
ज़िन्दगी की भाग-दौड़ में जो खुशियाँ पीछे छूट चुकी हैं, अब एक-एक करके उनको वापिस लाना है
कर लो खुद से ये वादा कि चाहे जो हो जाये, मुझे अब बस आगे ही बढ़ते जाना है

ये जो दिन ढल रहा है और फिर से रात होने को है, ऐसे में अरमान मेरे सोने को हैं
सोचता हूँ कि आज की रात मैं भी कुछ देर रुक कर अपनी थकान उतार लूँ
वो बात और है कि कल सुबह फिर से कुछ नई मुश्किलें मेरे दरवाजे पर दस्तक देंगी
माना कि अब तक तो मेरे हिस्से में सिर्फ हार आई है, पर मेरे हौंसले अभी भी कायम हैं
मैं जो निकला हूँ ढूंढ़ने अपनी मंज़िल को तो नहीं रुकूंगा, मुझमे अभी भी बहुत दम है
तारीख एक दिन गवाही देगी मेरी हिम्मत की, और मैं दिखा दूंगा इस ज़माने को
कि बस हर मुश्किल से टकराकर उसको पार करना आता है इस दीवाने को
तेरी भी हर ख्वाहिश हो सकती है पूरी बस तुझे खुद पर यक़ीन करना होगा
टूट कर अगर आज तो बिखरा है तो कल तुझको खुद ही संवरना होगा
तेरी हर हसरत भी होगी पूरी अगर तुझमे बुरे हालात से जूझने का जज्बा है
माना कि बहुत ऊँची है चढ़ाई मंज़िल तक पहुँचने की, पर तुझे चढ़ते जाना है
कर लो खुद से ये वादा कि चाहे जो हो जाये, मुझे अब बस आगे ही बढ़ते जाना है
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