कहना तो बहुत कुछ था उनसे पर उसे देखकर लब मेरे खामोश हो जाते हैं

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कहना तो बहुत कुछ था उनसे पर उसे देखकर लब मेरे खामोश हो जाते हैं

माँगा था जिनको दुआ में मैंने दिन रात सजदा करके

जब वो सामने आये तो हम बस उनको देखते ही रह गए

ऐसे लगा जैसे कि वक़्त थम गया हो

मुँह से अपने हम एक लफ्ज़ भी नहीं बोल पाए

हमें लगा कि ये हक़ीक़त है कि एक सपना

जिसे चाहा था मैंने कभी वो मेरे सामने थी रूबरू

नज़रें मिली जब मेरी उनकी नज़रों से तो ये हालत हुई मेरी

भूल गया मैं सब कुछ और बस तेरी सूरत में कहीं खो गया

बातें हुई फिर वादे की और वफ़ा की भी हमारे बीच में

मैंने पूछा उनसे सबब इतनी देर से आने का

तो उनकी खूबसूरत आँखों में आँसू छलक आये

उन्होंने कहा हमसे कि बड़ी मुश्किल से पहुंचे वो

ज़माने कि ज़ालिम नजरों से अपने आप को बचते बचाते हुए

जब हमने ये सुना तो खुद की सोच पर हमें बहुत अफ़सोस हुआ

हम तो उनको बेवफा ही मान बैठे थे

हमें क्या पता था कि वो वक़्त के हाथों मजबूर थे

आओ अब हम तुम एक दूजे के आगोश में कहीं खो जाते हैं

कहना तो बहुत कुछ था उनसे पर उसे देखकर लब मेरे खामोश हो जाते हैं