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कामयाबी का सूरज धीरे धीरे ही सही पर निकलता जरूर है

कामयाबी का सूरज धीरे धीरे ही सही पर निकलता जरूर है

कभी तो लगता है जैसे कि दिल में जोश है और जूनून अभी बाकी है

पर ऐसा भी होता है कि मन मुताबिक वक़्त और हालात नहीं मिलते

हर रोज़ देखता हूँ कि मैंने कितने कदम चले हैं सफलता की ओर

मन भी चंचल होता हैं भटकने की कोशिश करता रहता हैं

ये सब तो हर रोज़ की ज़िन्दगी का एक हिस्सा बन गया हैं

कभी कभी जब ये दिल मुश्किलों की वजह से उदास होता हैं

तो लगता हैं कि ऐ खुदा तू मेरे आसपास ही होता हैं

जब कभी मेरा दर्द हद से गुजरता हैं ऐसे हालत में

तो तेरी आवाज़ ये आती हैं कि मैं आता हूँ

अपने इन जज्बातों को तू अपने दिल में संभाल कर रखना

किसी ने अगर तेरी मजबूर आँखें देख ली तो मुश्किल होगी

राज़ अपने दिल के तूँ किसी पर जाहिर मत करना

इस शहर में दिल के नहीं बल्कि दर्द के सौदागर रहते हैं

आज लोग हँसते हैं तुम पर तो हंसने दो उनको

तुम्हारी कामयाबी से निकल जायेगा उनके दिमाग में जो फितूर हैं

कामयाबी का सूरज धीरे धीरे ही सही पर निकलता जरूर है