You are currently viewing किसी को पाने की खातिर हमने अपना सब कुछ खो दिया

किसी को पाने की खातिर हमने अपना सब कुछ खो दिया

किसी को पाने की खातिर हमने अपना सब कुछ खो दिया

बहुत समझाया सबने हमको कि बच के रहना

पर ये दिल है कि माना ही नहीं और गलती कर बैठा

अब बात बहुत आगे बढ़ चुकी है शायद

अब वापिस लोट कर आना बहुत मुश्किल होगा

कदम मेरे अब एक अनजाने सफर पर निकल पड़े हैं

कोई है जो पुकारता है मुझे नदिया के उस पार से

कैसे ना जाऊँ मैं जब वो देखता है मुझे बड़े प्यार से

लोगों की फितरत ने ना जाने कितनो को बर्बाद किया

रह गया है बहुत कुछ अधूरा जो हो सकता था पूरा

वादे पे अपने मैं मारा गया बंदा सीधा साधा

चैन क्या होता है और सुकून किसको कहते हैं

ये सब अब मेरे काम की बात ना रही

निकल तो पड़ा हूँ मैं इश्क़ की गाड़ी को लेकर अकेला ही

क्या करूँ जंगल भी गहरा है और तलब लगी है मिलने की

आ गयी उनकी याद और दिल मेरा आज फिर से रो दिया 

किसी को पाने की खातिर हमने अपना सब कुछ खो दिया