कुछ ऐसा इंतजाम हो जाये कि आज तेरे आने की खबर मिल जाये
तेरे आने का था हम सबको ना जाने कब से इंतज़ार
रात दिन काटें है मैंने कैसे तेरे बिना ये तो मेरा दिल ही जानता है
हो ना हो ये हवा तुझे छूकर आयी है मेरे पास
तेरे दिल ने ये कहा है मेरे दिल से कि क्यूँ हो आज इतने उदास

मेरी इस बेकरारी का सबब तो सभी जानते है पर तुमको खबर नहीं
क्या मेरी दीवानगी का तुम पर होता कोई असर नहीं
क्यों तुम मुझे परखते रहते हो ऐसे हालत में भी
कितनी बार मैंने तुमसे कहा है कि मैं बस तुम्हारा हूँ
माना की तूफान उठ रहे है तेरे दिल के समंदर में पर मैं तो किनारा हूँ
जब कभी कश्ती तेरी फंस जाये बीच भंवर में तो मुझे याद कर लेना
मैं कहाँ जाऊंगा मैं तो हर वक़्त तेरे आस पास ही रहता हूँ

तेरी सलामती के लिए मैं खुद को भी मिटा सकता हूँ
अब इससे ज्यादा मैं क्या कहूँ अपनी बेगुनाही में
अब मेरी मोहब्बत को सरे बाजार नीलाम ना कर हमदम
कहीं ऐसा ना हो कि आज तूँ और तेरा नाम मेरे दिल से उतर जाये
कुछ ऐसा इंतजाम हो जाये कि आज तेरे आने की खबर मिल जाये
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