कुछ भी बन जाना दोस्तों ज़िन्दगी में पर आशिक़ कभी ना बनना
आशिक़ जब भी कोई बनता है तो दिल टूट जाता है
और टूटे हुए इस दिल से बस यही सदा आती है बार बार
कि तुम कभी भी किसी से अपनी मोहब्बत का इजहार नहीं करना
जब मिलते हैं हम पहली बार इन हसीनों से

तो ये खाते हैं कस्मे साथ जीने मरने की
हाथ तुम्हारा थाम कर जीवन भर साथ चलने की
पर ये तो बस एक फ़साना है कोई हक़ीक़त नहीं
असल में तो हम उनके दिल बहलाने की चीज़ से ज्यादा कुछ नहीं
दिल तोड़कर हँसते हैं हम पर बड़ी बेदर्दी से
बेवफा से सहारे की उम्मीद करना ही बेकरार है
अब तो इनके चक्कर में मेरा लूट गया संसार है
ये आपको बीमार ऐ दिल बना कर छोड़ देते हैं

फिर करके महफ़िल में बदनाम लोग मज़ा लेते हैं
इस तरह से इनकी बेवफाई बड़ी मशहूर है ज़माने में
मेरा भी दिल गलती कर बैठा हैं इनसे दिल लगाने में
तुमसे किये सब वादे तोड़ कर एक दिन अनजान बन जाते हैं
कुछ भी बन जाना दोस्तों ज़िन्दगी मैं पर आशिक़ कभी ना बनना
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