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कैसे तुझसे दिल ना लगाए कोई

कैसे तुझसे दिल ना लगाए कोई

तेरे जैसा हसीन नहीं दूसरा कोई

मैं तो चला था ये सोचकर तेरी तरफ

कि तुम आगे बढ़कर मुझे थाम लोगी

कदम मेरे डगमगा गए थे बस तेरे ही भरोसे पर

उम्मीद थी हमारी कि तुम मेरे हो जाओगे

गुलाब का फूल मेरे हाथ में ना जाने कब से है

इंतज़ार है मुझको बस एक तेरी हाँ का

हो सकता है कि तेरी नज़र कहीं और हो

पर मेरा तो हर नज़ारा बस तुम ही हो

बहुत दूर निकल आया हूँ तेरी चाहत में

अब वापिस लौटना नामुमकिन है मेरे लिए

सफर ये कैसा है ये मुझको बताए कोई

कैसे तुझसे दिल ना लगाए कोई