क्या आपका सनम भी आपसे रूठा है
रूठे रूठे से सनम को आखिर मनाये कैसे
सनम चाहे किसी का भी हो दोस्तों
कभी ना कभी तो रूठता ज़रूर है
इस बात से नहीं कोई फर्क पड़ता

कि गलती आप दोनों में किसकी है
छोटी सी ये ज़िन्दगी मिली है प्यार करने को
इसको हम प्यार से ही गुजार ले तो अच्छा है
कौन जीता है ज़बान की जंग और कौन हारा है
इन बेकार की बातों में क्या रखा है
दूर जाने ना दो उनको जो तुमसे रूठे हैं
आगे बढ़कर मना लो उनको प्यार से
लगा दो एक गुलाब का फूल उनकी जुल्फों में

और सुलझा लो सभी उलझनों को आज
बता दो अपने सनम को तुम आज ही
कि तुम कितना प्यार करते हो उनको
क्यूंकि कहीं देर ना हो जाये मेरे दोस्तों
प्यार इश्क़ और मोहब्बत से ना कोई बचा है
क्या आपका सनम भी आपसे रूठा है
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