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क्या मेरे भीतर भी कभी शांति होगी

क्या मेरे भीतर भी कभी शांति होगी

या सिर्फ विचारो की ही क्रांति होगी

मेरा जीवन तो बस एक कोरा कागज़ है

कोई क्या पढ़ेगा मेरे जीवन की किताब

हर रोज़ जंग होती है दिल और दिमाग के बीच

ये दुनिया हर रोज़ नए रंग बदलती है

अब तक तो मैं ढूंढ़ता रहा खुशियों को

नहीं रहा कोई अनुभव मुझे जीवन जीने का

कब तक यूँ ही मैं अपना जीवन गंवाता रहूँगा

कोई तो हो जो मुझे सही रस्ते पर चला दे

दिल में उठती है लहरें सागर की तरह

मंज़िल मुझे तलाशती है और मैं सफर में हूँ

क्या मेरे भीतर भी कभी शांति होगी

या सिर्फ विचारो की ही क्रांति होगी