क्या सब कुछ पहले से ही तय है, हमारे हाथ में कुछ भी नहीं

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क्या सब कुछ पहले से ही तय है, हमारे हाथ में कुछ भी नहीं
दोस्तों आप लोगों ने कई बार देखा होगा कि कुछ लोग बहुत ही ज्यादा मेहनत करते हैं लेकिन उनको जीवन में कुछ ख़ास हाँसिल नहीं होता, जबकि कुछ लोग कुछ ख़ास नहीं करते पर फिर भी उन्हें बड़ी जल्दी सफलता मिल जाती है ! आप को शायद ये लगता होगा कि मैं तो दिन – रात मेहनत करता हूँ लेकिन फिर भी मुझे परिणाम क्यों नहीं मिल रहा ! लेकिन शायद आप ये नहीं जानते कि ये जीवन कई बार हमें वो नहीं देता जो हम चाहते हैं ! हम लोग तो जैसे वक़्त के हाथों की कठपुतली हैं ! जब भी हम अपनी भाग – दौड़ से थक जातें है और मायूस हो जाते है तो खुद से एक सवाल पूछते हैं : क्या सब कुछ पहले से ही तय है, हमारे हाथ में कुछ भी नहीं ?

दोस्तों आज मैं कोशिश करूँगा कि आप लोगों के इस सवाल का जवाब दूँ कि हमारे हाथ में कुछ भी नहीं, सब कुछ तो पहले से ही तय होता है ! होता वही है जो होना होता है, हम तो केवल माध्यम है ! ना हमारा जनम हमारे हाथ में होता है और ना ही मृत्यु तो फिर किस बात को हम नियंत्रित कर सकते हैं ? दरअसल हम कुछ भी नियंत्रित नहीं कर सकते ! हम बेकार में ही चिंता करते हैं कि मैं ये कर दूंगा, मैं वो कर दूंगा ! असल में हम कुछ भी नहीं कर सकते जब तक प्रकृति की मर्ज़ी ना हो ! प्रकृति ने हमारे जनम से पहले ही हमारे लिए सब कुछ निश्चित कर रखा है ! हम तो केवल केलिन्डर पर तारीख ही बदल रहे हैं ! इस केलिन्डर को हमने नहीं बनाया , प्रकृति ने बनाया है !

मैं आपको एक उदाहरण देकर समझाता हूँ ! मान लीजिये आप डॉक्टर बनना चाहते थे और आप ने इसके लिए बहुत ही ज्यादा मेहनत भी की थी लेकिन जब आपकी परीक्षा हुई तो आप उसमे पास नहीं हो सके और आपके डॉक्टर बनने का सपना चूर – चूर हो गया ! तो क्या इसका मतलब ये है कि अब आपका जीवन समाप्त हो गया ! नहीं, ऐसा बिलकुल नहीं है ! ये माना कि आप डॉक्टर नहीं बन पाए लेकिन पता चला कि आप एक बिजनेसमैन बन गए और बहुत ही ज्यादा पैसे भी कमा रहे है ! तो क्या आप सारी उम्र ये सोच कर रोते रहेंगे कि आप डॉक्टर नहीं बन पाए या फिर आप एक बिजनेसमैन के तौर पर अपनी ज़िन्दगी को आगे बढ़ाएँगे ! आप अपनी किस्मत को दोष ना दे, आप वही बनते है जो प्रकृति आप को बनाना चाहती है और प्रकृति का फैसला हमेशा ही सही होता है और इस फैसले को कोई भी नहीं बदल सकता !

मैंने देखा है कि इस जीवन से कोई भी व्यक्ति संतुष्ट या खुश नहीं है ! किसी के पास धन – दौलत की कमी है, किसी की बीवी सुन्दर नहीं हैं, तो किसी के पास एक बढ़िया नौकरी नहीं है, किसी का स्वास्थय ठीक नहीं है ! अगर आप अपने चारों तरफ ध्यान से देखें तो आप पाएंगे कि हर व्यक्ति के जीवन में कोई ना कोई कमी ज़रूर है और किसी भी व्यक्ति सम्पूर्ण नहीं है ! केवल प्रकृति ही संपूर्ण है और कोई भी नहीं ! बेलगाम इच्छाओं की वजह से ये मानव – जीवन आज दर – दर की ठोकरें खा रहा है और बहुत ही ज़्यादा दुःख भोग रहा है ! तो इस दुःख के पीछे का असली कारण क्या है ? इस दुःख का असली कारण है होने जीवन को नियंत्रित करने का असफल प्रयास करना ! अगर आपके भाग्य में लिखा है तो आप अपने लक्ष्य को पाने के लिए खूब मेहनत भी कर लेंगे और उसको प्राप्त भी कर लेंगे लेकिन अगर प्रकृति ने कोई चीज़ आपके भाग्य में नहीं लिखी तो वो आपको कभी भी प्राप्त नहीं होगी चाहे आप कितना भी प्रयास क्यों ना कर ले ! अगर आप चाहे तो आजमा कर देख ले, ये बात बिलकुल सच है !

आपने देखा होगा कि खूबसूरत आदमी को एक बदसूरत पत्नी मिल जाती है और बदसूरत आदमी को एक खूबसूरत पत्नी मिल जाती है ! इसको आप क्या कहेंगे ? ये सब प्रकृति करती है ! आपके जीवन में कौन कब आएगा , ये सब पहले से ही तय है ! इसको आप चाहकर भी बदल नहीं सकते, बस यही अटल सत्य है बाकी सब झूठ है ! दरअसल हम एक झूठी और काल्पनिक दुनिया में जी रहे हैं जिसका हक़ीक़त से दूर – दूर तक कोई वास्ता नहीं है ! इसी वजह से हम भटक जाते हैं और जीवन को एक बोझ की तरह ढोते है ! देखा जाये तो ये सब भी प्रकृति ही तय करती है कि आपके जीवन की दशा और दिशा कैसी होगी ? कुछ लोगों के लिए ये ज़िन्दगी एक खूबसूरत सफर है तो कुछ लोगों के लिए ये एक दुःख भरी दास्ताँ है ! चाहे हम माने या ना मानें, ये सब प्रकृति का खेल है !

तो अब सवाल ये उठता है कि हमें क्या करना चाहिए ? क्या हमें हाथ पर हाथ रखकर बैठ जाना चाहिए और कुछ प्रयास नहीं करना चाहिए ! इस मानव जीवन में हमें कर्म तो करना ही होगा, और हम कर्म करने से बच नहीं सकते ! लेकिन अगर हम जीवन में सच्ची ख़ुशी को पाना चाहते है तो हमें निस्वार्थ भाव से कर्म करना होगा बिना किसी फल की इच्छा किए हुए क्यूंकि फल हमारे हाथ में नहीं है ! हमें हर काम को सच्ची निष्ठा और लगन से करना चाहिए ! सफलता या असफलता दोनों ही इस जीवन के अभिन्न अंग हैं और दोनों ही साथ – साथ चलते हैं ! प्रकृति इन दोनों के बीच खुद ही संतुलन बनाती और हमें वो देती है जो हमारे लिए सही है नाकि वो जो हमें चाहिए !

तो आइये हम आज से ये कोशिश करें कि हम अपना ध्यान केवल काम करने पर लगाएंगे और बाकी सब प्रकृति पर छोड़ देंगे ! मैं आपको दावे से कहता हूँ कि जो भी होगा वो आपके लिए हमेशा अच्छा ही होगा ! इसलिए इस जीवन को खुल कर जिए और हमेश मस्त रहे ! शायद आज आपको अपने इस सवाल का जवाब मिल गया होगा कि “क्या सब कुछ पहले से ही तय है, हमारे हाथ में कुछ भी नहीं”?

आपका बहुत – बहुत धन्यवाद !