खुद पर भरोसा कर के देख तूँ जीत जायेगा एक दिन
क्या हुआ जो जीता नहीं तूँ कभी भी
एक बार फिर से कोशिश कर के देख ले
समंदर की लहरें करती हैं कोशिश

ना जाने कितनी बार किनारे को छूने की
तूँ भी करले हिम्मत और कस ले कमर
शायद तेरी मंज़िल का पता मिल जायेगा तुझे
यूँ ही चलते चलते इन टेढ़ी मेढ़ी राहों पर

माना कि ये सब लगता है जैसे कि एक सज़ा है
पर इस सफर का भी अपना मज़ा है
ये ग़म का मौसम भी बीत जायेगा एक दिन
खुद पर भरोसा कर के देख तूँ जीत जायेगा एक दिन
Amazon Link to Buy Book:
