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जब दिल से तुम्हारे किसी के लिए दुआ निकले

जब दिल से तुम्हारे किसी के लिए दुआ निकले

तो समझ लेना कि तुम्हे इश्क़ हो गया है

आशिक़ तो मांगते हैं सबकी खैर हरदम

तुम भी खा लो अब ये मोहब्बत की कसम

तेरी आँखों से जब भी दिल की बात होती है

लगता है जैसे कोई अफसाना तो ज़रूर बनेगा

दो चार मुलाकातें अगर और हो गयी हमारी

तो फिर दिल तुम्हारे बिना कैसे रह पायेगा

अब तो हमको तुम्हारी आदत सी हो गयी है

करवटें लेता रहता हूँ रात भर तेरे लिए

सोचता हूँ कि कल कह दूंगा तुझे दिल की बात

पर सामने जब भी तुम आ जाते हो

तो कुछ भी कहने से मैं डरता हूँ

सुना है कि तुमको है फूल बहुत पसंद

तो मैं ढूंढ रहा हूँ सब से सूंदर गुलाब तेरे लिए

सारे गुलशन को छान मारा मैंने तो

असल में तुमसे हसीन गुलाब मुझे तो कहीं ना मिला

तेरी आशिकी अब मेरी तक़दीर बन गयी है

दिल को मैं अपने समझा लूंगा तुझे पाने के लिए

चले जाना ज़रा कुछ देर तो ठहरो तुम

तेरी याद को मैं सीने से अपने लगा लेता हूँ

कई बार चाँद रातों में मैं खुद को तेरी खातिर जगा लेता हूँ

रात दिन गुजर जातें है मेरे ये कब

मुझे नहीं रहती इस बात की खबर कभी

दिल की ये आरज़ू है कि तुम मेरे हो जाओ

तुम अब बस मेरे दिल की धड़कन बन जाओ

तुम भी मेरे ख्यालों में कहीं खो जाओ

जो भी अब तुमको कहना हो मुझसे

पर मुँह से तुम्हारे कभी ना आह निकले

जब दिल से तुम्हारे किसी के लिए दुआ निकले