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जब प्यार किसी से होता है तो फिर ये दिल अपने काबू में कहाँ रहता है

जब प्यार किसी से होता है तो फिर ये दिल अपने काबू में कहाँ रहता है

दिल का क्या है जनाब बस ख्वाबों के पंख लगा कर उड़ जाता है

होता है जब भी जिक्र तेरा तो ये मौसम भी करवट बदलता है

लग जाती है सावन कि झड़ी और मेरा ये दिल मोर बन कर नाचता है

वैसे तो सबके सनम ही खूबसूरत होते है बस देखने वाले की नज़र चाहिए

पर मेरा जो महबूब है वो तो सबसे अलग और सबसे न्यारा है

बेवजह रूठने और फिर खुद ही मान जाने का सबब

अगर इश्क़ नहीं तो फिर और क्या है जनाब

जिस रोज़ भी तुम नहीं मिलते मुझसे तो दिल ये मेरा घबराता है

पर सामने जब भी आ जाते हो तुम तो कुछ भी कहने से डरता है

ये दिल की बातें तो दिल ही जाने मैं तो बस मेरी जान यही जानता हूँ

कि रब ने बनाया है हमें एक दूजे के लिए जब तक ये कायनात है

जब भी क़यामत के दिन ख़ुदा से मुलाकात होगी तो फिर से तेरा साथ मांग लूंगा

तूँ कहे तो मांग तेरी मैं भर दूँ अपने इस लहू से भी

तेरा एक इशारा ही काफी है मेरे लिए खुद को तुम पर मिटाने को

तुझ को पाने की खातिर मैं कुछ भी कर सकता हूँ मेरे महबूब

मेरा ये प्यार भरा बेकरार दिल आज ये तुमसे कहता है

जब प्यार किसी से होता है तो फिर ये दिल अपने काबू में कहाँ रहता है