जब भी सफर में कभी एक मुसाफिर एक हसीना से मिलता है
तो फिर दोनों के बीच में चाहत का फूल ही खिलता है
ये ज़िन्दगी भी तो एक सफर ही है यारों
हम सब इसके मुसाफिर हैं और मंज़िल है सबकी अपनी अपनी
कुछ की मंज़िल पास है तो कुछ की मंज़िल दूर है

पर इस सफर में सबको चलना तो ज़रूर है
चलते चलते कभी जो नैना लड़ जाते है किसी से
तो कुछ देर ठहरने का सबब मिल जाता है
फिर वो कहते हैं हमसे कि ओ दूर के मुसाफिर
हमको भी अपने साथ ले ले नहीं तो हम रह जायेंगे अकेले
मुसाफिर सोचता है कि क्या करूँ किसको चुनू
एक तरफ है मज़िल तो दूसरी तरफ है महबूब
ये स्थिति भी बड़ी अजीब है और बहुत ही खूब
कदम चलना चाहते हैं पर दिल रुक जाता है
शायद इसी कश्मकश में ही इश्क़ हो जाता है
रास्ता है बहुत लम्बा और कठिन जो तय करना बाकी है
और वक़्त है कि गुजर रहा है तेजी से हर पल
सफर में मेरे फूल कम और कांटे ज़रा है ज़्यादा

बोलो मेरे सनम तुम्हारा क्या है इरादा
तो उनका ये ख्याल है कि हम बन जाते है हमसफ़र
साथ चलेंगे हर हाल में और हर राह में ज़िन्दगी भर
ये लो दोस्तों अब हमारा काफिला फिर से आगे निकलता है
जब भी सफर में कभी एक मुसाफिर एक हसीना से मिलता है
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