ज़माने में मोहब्बत तो बहुत से लोग करते हैं पर निभाता है कोई कोई

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ज़माने में मोहब्बत तो बहुत से लोग करते हैं पर निभाता है कोई कोई

दिल के अरमान जब मचलते हैं तो तलाश शुरू जो जाती है किसी साथी की

जब भी जवानी में पहला कदम पड़ता है किसी भी शख्श का

तो दिल की धड़कने बढ़ने लगती हैं किसी का नाम आने पर

हाथों में गुलाब लेकर निकल पड़ते हैं नौजवान अपनी महबूबा को रिझाने

सीख लेते हैं शायरी भी दोस्तों से अपने दिल की बात कहने को

जब भी किसी हसीना से आँखें चार हो जाती हैं बाली उमर में

तो फिर आँखें अपने दिलबर के ख्वाब देखने लगती है रातों में

मदहोशी सी छा जाती है और होश भी हो जाता है गुम

ऐसे हालात में दिल को संभालना बड़ा मुश्किल हो जाता है

कभी कभी दर्द ए जुदाई में जब ये दिल उदास होता है

तो एक जाना पहचाना चेहरा भी आस पास होता है

अपने महबूब के इंतज़ार में बीता एक पल भी सदियों जैसा लगता है

पर ये मुमकिन नहीं कि जिसे हम चाहे वो भी हमें चाहता हो

कभी कभी किसी बेवफा से भी वास्ता पड़ जाता है

ये इश्क़ अगर दोनों तरफ हो तो ही मज़ा देता है

मगर प्यार जब एक तरफ़ा ही हो तो सजा भी बन जाता है

जब मोहब्बत की राहें वीरान हो जाएं तो रास्ता दिखाता है कोई कोई

ज़माने में मोहब्बत तो बहुत से लोग करते हैं पर निभाता है कोई कोई