ज़िन्दगी की चुनौतियों से तूँ टकराता चल
हम होंगे कामयाब कभी एक दिन मेरे दोस्त
ये गीत तूँ अपने जीवन में गुनगुनाता चल
जब कभी हो सामना तेरा ऊँची लहरों से
तो कश्ती को अपनी चलाते रहना रुकना नहीं

समंदर भी बन जाए अगर जानलेवा सफर में
तो घबराना नहीं बस आखरी सांस तक लड़ना
हार और जीत तो किसी के बस में नहीं होती कभी
तूँ भी बिना ये सोचे कर ले सामना हक़ीक़त का
ज़िन्दगी का अगला ही पल कैसा होगा
ये तो किसी ने समझा नहीं और जाना नहीं

शतरंज की बाजी की तरह है ये वक़्त
कभी शय मिलती है तो कभी मात हो जाती है
चार यार और मस्तानी शाम की दास्तान
याद है तुमको कि भूल गए हो सब कुछ
वो पल जब तुमने ठाना था कि
अब कुछ कर के दिखाना है
रेगिस्तान में जैसे पानी की एक बूँद

तरसती हुई ज़िन्दगी को फिर से ज़िंदा करती है
उसी तरह से उम्मीद की एक हल्की सी किरण
तेरी ज़िन्दगी को फिर से रोशन कर सकती है
कुछ नहीं है ये वक़्त भी गुजर जायेगा
तेरा भी बनेगा काम और वक़्त तेरा भी आएगा
बचपन, जवानी और बुढ़ापा ये तो जीवन का चक्कर है
इन सब में पड़कर तूँ अपने लक्ष्य से मत भटकना

जब तक सांस होती है यारों
तब तक आस भी रहती है दोस्तों
बात ये अनमोल है ये भी जान ले तूँ
ज़िन्दगी का ये फलसफा तूँ समझ ले आज
और यही बात दूसरों को भी समझाता चल
ज़िन्दगी की चुनौतियों से तूँ टकराता चल
Amazon Link to Buy Book:
