ज़िन्दगी के रँग भी हैं कितने अजीब लोग मिलते हैं जुदा होते हैं
कभी तो मान जाते है खुद ही कभी खुद ही खफ़ा होते हैं
ख़ुश रहते हैं वही दिल यहाँ पर जो बेवफ़ा होते हैं
वफ़ा का खरीदार कोई नहीं यहाँ पर जीवन के बाजार में
पागल कहते हैं लोग उनको जो वफ़ा करते हैं
जो भोले भले लोग हैं उनका ज़माना जमकर फायदा उठाता है
मिलती है रुस्वाई उनको उम्र भर के लिए हर कदम पर
चले जाते हैं अपने भी छोड़ कर धीरे धीरे चुपके चुपके
बस काम की यारी और दोस्ती रह गयी है अब तो
मतलब निकलते ही आप किसी के किसी काम के नहीं रहते
वक़्त रहते ही ख़बरदार हो जाओ मेरे हुज़ूर
ये ज़िन्दगी की कसौटी है कोई मखौल नहीं है
इससे पहले कि ग़म के अँधेरे में डूब जाये ये ज़िन्दगी
संभाल लो खुद को और फासले बना कर चलो ऐसे लोगो से
कभी जो ये बढ़ाना चाहें नज़दीकियाँ आप से तो समझ लेना
कि ये बड़ा ही खुदगर्ज़ ज़माना है बिना मतलब के कोई नहीं मिलता
खैर यही हक़ीक़त ऐ ज़िन्दगी है कि अपने भी कभी कभी बेवफ़ा होते हैं
ज़िन्दगी के रँग भी हैं कितने अजीब लोग मिलते हैं जुदा होते हैं
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