
ज़िन्दगी चल रही थी मेरी बैलगाड़ी की तरह, इसको मुझे राकेट बनाना ही होगा
बहुत जी लिए ऐसी ज़िन्दगी जो रेंग कर चल रही थी
अब मुझको इन तेज़ हवाओं पर सवारी करनी है
ये माना कि सफर ये आसान नहीं होगा पर कोई बात नहीं
जो भी करना है अब अपनी मर्ज़ी से करना है
डर-डर कर जीना भी क्या ख़ाक जीना है
जो होना है वो तो होकर ही रहेगा चाहे जो हो जाये
तुमसे मिलकर ही ये सीखा है कि चलो अब खुल के जिया जाए
चलूँ मैं धुप में भी या फिर कुछ देर छाँव में ठहर जाऊँ
अगर तुम कहो तो मैं अपनी इस थकान को भी भूल जाऊँ
चलो तुम ऐसे कि ज़माने में तुम्हारी एक अलग पहचान हो
जिओ कुछ ऐसे कि तुम्हारा भी आत्म-सम्मान हो
आज मैं कोई ऐसा गीत गाऊँ कि तेरे दिल में एक आरज़ू जगाऊँ
अगर तुम कहो तो मैं तेरी राहों में अपनी ये पलकें बिछाऊँ
चले थे हम साथ मिलकर और चलना होगा हमें साथ मिलकर
तुम्हे रुकना पड़ेगा मेरी आवाज़ सुनकर
तुझे अपना वायर बना कर मुझे खुद को सॉकेट बनाना ही होगा
ज़िन्दगी चल रही थी मेरी बैलगाड़ी की तरह, इसको मुझे राकेट बनाना ही होगा
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