जाने क्या बात है दिल मेरा कहीं नहीं लग रहा
खोयी खोयी सी है ये ज़िन्दगी किसी की तलाश में
कभी मिलते हो तो कभी जुदा हो जाते हो
कभी हँसते हो तो कभी खफा हो जाते हो
दिल के जज्बात सँभाल कर रखे हैं तेरी खातिर
जरा सा झूम लूँ मैं इस रंगीन मौसम में
अगर तेरी इज़ाज़त हो तो मेरे हुज़ूर
घर से निकल पड़ो अब तुम भी
मैं तेरे इंतज़ार में खड़ा हूँ कब से
तुम जब आओगी तो बयां कर दूंगा अपना अफसाना
कैसे बनाया है तुमने मुझको अपना दीवाना
देखो बारिश हो रही है आज जोरों की
तुम भी अपना छाता मत लेकर आना
भीग जातें हम इसमें और मज़ा लेते हैं मिलकर
जाने क्या बात है दिल मेरा कहीं नहीं लग रहा
Amazon Link to Buy Book:
