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जी करता है आज मेरा कि कहीं दूर निकल जाऊं 

जी करता है आज मेरा कि कहीं दूर निकल जाऊं 

कुछ पल के लिए मैं अब आराम करना चाहता हूँ

कभी कभी काम करते करते ऐसा भी होता है

कि ये दिमाग थक जाता है

और ऐसा लगता है कि बस अब बहुत हुआ

इस तरह के हाल में अपना ख्याल रखना

हो सके तो कुछ दिन की छुट्टी ले लेना काम से

इस दिल को बहलाना भी बहुत ज़रूरी है

जब भी काम से घर लोटो तो फिर

अपने परिवार पर कभी मत चिल्लाना

इस रोज़ के तनाव से खुद को बाहर निकालना

आज हम देखते हैं कि लोग हंसना मुस्कुराना भूल गए हैं

लोग आजकल काम के बोझ तले दब गए हैं

पहले के ज़माने में ऐसा नहीं होता था

लोगों की ज़रूरत कमाई के हिसाब से होती थी

ना कोई भी दिखावा था ना कोई किसी से मुकाबला था

हर इंसान जीता था ज़िन्दगी खुश होकर हर हाल में

लोग दुख सुख में एक दूसरे के आते थे काम

मिल बाँट कर खाने का रहता था इंतजाम

घर के बड़ो का घर में होता था सम्मान

दादी और नानी की कहानी आज भी याद आती है

पर ये सब तो अब गुजरे ज़माने की बातें है

वो फुर्सत के पल और वो बेफिक्री का आलम

फिर से ढूढ़ता हूँ मैं अपनी ज़िन्दगी में

ये ज़िन्दगी की उबड़ खाबड़ है राहें

कहीं ऐसा ना हो कि मैं इन पर फिसल जाऊं

जी करता है आज मेरा कि कहीं दूर निकल जाऊं