झुक रही है उनकी नज़र और चेहरा भी खिला है ऐसा अक्सर प्यार में होता है
जब भी लेते हैं वो अंगड़ाई तो जैसे क़यामत ही आ जाती है
ऐसा कहते हैं वो कि कर लो दिल की बात हमसे
क्या पता कल ये मुलाकात फिर से होगी कि नहीं
आज ही भर लो हमें बाहों में ये ख़्वाहिश है उनकी

क्या पता ये चाँदनी तारों भरी रात कल होगी कि नहीं
आज बस हम तुम है और कोई दूसरा तो नहीं
अब किस बात का पर्दा बाकी रहा हमारे बीच में
जब हम दो दिल और एक जान बन गए हैं
ये जो तेरी जुल्हों में लगे हुए फूल महक रहे हैं
कभी ये फूल भी कली हुआ करते थे
एक दिन इन कलियों की मुलाकात दीवाने भंवरों से हो गयी

और फिर ये कलियाँ फूल बन कर खिल गई गुलशन में
तुम भी कुछ ऐसे ही मेरे जीवन की बगिया में बहार ले आओ
क्या तुम पर हमारा इतना भी इख़्तियार नहीं मेरे हमदम
ये सब तो लाजमी है अगर दो दिलों में इश्क़ का इजहार होता है
झुक रही है उनकी नज़र और चेहरा भी खिला है ऐसा अक्सर प्यार में होता है
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