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तुझे दिल से चाहा था हमने, क्या यही थी हमारी खता

तुझे दिल से चाहा था हमने, क्या यही थी हमारी खता

जब वक़्त आया अपनी वफ़ा साबित करने का

तुमने तो मेरी एक ना सुनी

गैरों की बातों पर ही तुमको था यक़ीन

और आज ये हालत हो गयी है कि

मोहब्बत हमारी यतीम होने को है

थक चूका हूँ मैं तो कोशिश करके

अब मैंने तो सब तुझपे छोड़ दिया है

जब तुम्हे हो अहसास अपनेपन का

तब चली आना तुम मेरे पास

मैं हूँ तुम्हारा ही जब तक है साँस

तेरा ही दिल तो है अब मेरी मंज़िल का पता

तुझे दिल से चाहा था हमने, क्या यही थी हमारी खता