तुमसे मिलने की तम्मना मेरी पूरी ना हो सकी
चाहत मेरी अब ले रही है तेरे बिना सिसकी
दिल में तेरी यादों का भंवर उठ रहा है
जैसे कोई शाँत पानी में पत्थर मार दे ज़ोर से

यूँ तो रूठने के बहाने तो मेरे पास भी हैं बहुत
पर मैं क्या करूँ मैं तो चाहत का मारा हूँ
वो बात और थी कि मेरा तुमसे था कुछ रिश्ता नाता कभी
पर आज हालत ये है कि मुझसे तेरे बारे में पूछते है सभी
कौन मिला और कौन बिछड़ा ये बात अब मायने नहीं रखती
अगर तुम मिल जाती मुझको तो मेरी चाहत पर मुझको नाज होता

ना जाने क्या बात है आज बड़ी लम्बी रात है
दिन मेरा तो गुजर जाता है आवारा रास्तों पर चल कर
पर जिस्म में कोई खास हलचल भी नहीं होती आजकल
तेरे किये हुए इशारे आज भी मुझे बेकरार करते हैं
पी लेने दो मुझको आँसू ये मेरी बर्बाद मोहब्बत के
तपती दोपहर में जब तुम मिलने आती थी कभी
तो दिल को मेरे बड़ी अजीब सी ठंडक मिलती थी

आँखें आजकल ख्वाब कुछ कम ही देखती हैं
शायद ये भी समझ गयी हैं कि तुम ना लौटोगे अब
दिल तो तेरा भी शायद तुझसे शिकायत करता होगा
एक मासूम से आशिक़ का दिल तुमने है तोड़ा जानबूझ कर
होश में रहने की तो अब कोई भी वजह ना रही मेरे पास
ये चंद लम्हे बचे हैं बस इनको संभाल रखा है मैंने
कल किसी और हसीन चेहरे को भी देखा था हमने

शायद वो कुछ कहना चाहती थी मुझको
क्या मैं फिर कभी इश्क़ कर पाउँगा कि नहीं
एक बार दिल टूटने पर क्या ये जुड़ता है
ये तो मैं नहीं जानता कि क्या होगा आगे
अभी तो ये बीतने वाली शाम मेरी सिंदूरी ना हो सकी
तुमसे मिलने की तम्मना मेरी पूरी ना हो सकी
Amazon Link to Buy Book:
