तुम आओ मेरे रूबरू मेरे महबूब तो मेरी बात बने
इस दिल का आज है बस तकाजा यही
ज़िंदगानी मेरी ना बीत जाए बस यूँ ही कि
तुम रूठती ही रहो और मैं मनाता रहूं तुमको
चाँद ये चेहरा कब तक छुपाते रहोगे हमसे

कभी तो आओगे बाहर घर से अपने
और दीदार तेरा होने की कुछ तो उम्मीद होगी
दुनिया में हर कोई चाहता कि उसकी जीत हो
पर मैं तुझपर अपना दिल हारना चाहता हूँ
तेरे इश्क़ की धुन में अब खोने लगा हूँ मैं
दिल मेरा तेरे इश्क़ में बस यूँ ही मचलता रहे

रोज़ तुम मुझको अपना जलवा दिखाते रहो
उम्र भर ये सिलसिला बस यूँ ही चलता रहे
खुदा से मांग लूंगा मैं तेरा इश्क़ हमेशा के लिए
तुम आओ मेरे रूबरू मेरे महबूब तो मेरी बात बने
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