तुम क्यों चले आते हो मेरे ख्वाबों में रोजाना
क्या मैं हूँ तेरी मंज़िल और तूँ है मेरा ठिकाना
जब मैं तुमसे मिलने को कहता था
तुमने तो हमेशा ही इंकार किया
आज शायद दिल तेरा भी बेकरार है

लगता है जैसे कि तेरे दिल में भी मेरे लिए प्यार है
अब तुम्हे समझ में आया होगा ये कि
आशिकी भला चीज़ क्या होती है
प्रेम का रोग इस दुनिया में किसी को भी
ना जीने देता है और ना ही मरने
आ जाओ तुम इज़हार ऐ मोहब्बत करने
मज़ा तो अब आ रहा है इश्क़ करने का

बेकरार अब इधर हम हैं
तो उधर तुम भी हो बेचैन
ऐसे ही प्यार का सुरूर हम पर चढ़ता रहे
हम कभी भी ना बिछड़े कभी
और दिल हमारे यूँ ही मिलते रहें
आशिक़ तो बना दिया है आपने मुझको
अब और क्या बाकी रहा है मेरे पास
अब ये भी बता दो कि इसका अंजाम क्या होगा

चलते रहना साथ हमारे इश्क़ की राहों में
तुम हमसे कभी भी जुदा मत होना
अब चाहे हमको ख़ुशी मिले या गम एक दूजे के रहें हम
मेरा तो बस यही ख्वाब है मेरे सनम
कि बाँहों में मेरे रहे तूँ हर वक़्त
हाल ऐ दिल सुना दिया है तुझको मैंने
मैं यहीं मिलूंगा तुमको जब जी चाहे चली आना
अब जाकर मिला मेरे दिल को सुकून और करार है

इसी एहसास को कहते हम प्यार हैं
ख्वाबों से निकल कर अब तुम हक़ीक़त बन जाना
तुम क्यों चले आते हो मेरे ख्वाबों में रोजाना
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