तुम दुखी क्यों हो ये जानता हूँ मैं

Posted by

तुम दुखी क्यों हो ये जानता हूँ मैं
तुम्हारा ये दुःख तो बस दो कौड़ी का है
ये दुःख तुमने खुद ही अपने लिए बना रखे हैं
तुमने अपने आप को कभी नहीं बदला
वक़्त ने हर बार तुझको इशारा किया है कि सुधर हो
पर तुम्हारी आँख पर तो जैसे पट्टी बंधी है
उड़ते हुए तीर लेना छोड़ दो तुम
ऐसी दशा में तुम पूछते हो कि संसार किसने बनाया
क्या करोगे ये जान कर जब जीवन का तीर तुम्हारी छाती में घुसा है
इतनी गहरी बातें समझ पाना तुम्हारे बस की बात नहीं
झूठी गहरायी में उतर कर क्या निकल लोगे तुम
अपनी आत्मा को तो तुमने बेच दिया है बिना सोचे समझे
तुम्हारी बीमारी का इलाज़ कहीं नहीं है क्यूकि
वहम का इस दुनिया में नहीं कोई इलाज़ दोस्तों
तुम्हारे दुःख का कोई कारण नहीं ऐसा मानता हूँ मैं
तुम दुखी क्यों हो ये जानता हूँ मैं

We offer poetry and lyric writing services for all your needs, personal or professional, in English and Hindi. To avail the service, please contact by email: rajeevkharb_2007@rediffmail.com