तूने जो दिया है मुझको वो दर्द ही सही पर मुझको कबूल है

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तूने जो दिया है मुझको वो दर्द ही सही पर मुझको कबूल है
तुझे मैंने अपना सब कुछ दे दिया है अब देखना है क्या होता है
दिल और जान दोनों तेरी चाहत पर कुर्बान कर दी हैं
अब ना जाने अंजाम क्या होगा मेरी मोहब्बत का
चाँद सिफारिश करता मेरी तो मैं बता देता तुमको मेरी जान
कि कितनी रातें काटी हैं मैं जाग कर तेरी याद में
तुझे ना देखूं तो चैन मुझे अब आता नहीं आजकल
तेरी यादों के जुगनू मेरी आँखों में टीम-टिमाते रहते हैं
मेरे पास आकर महसूस करो मेरी बेकरारी को
यूँ ही दूर से मेरे हालात का अंदाज़ा लगाना ठीक नहीं
मैं तेरे प्यार में पागल हूँ और हो गया है मुझको प्रेम-रोग
तेरी गलियां हैं अब मेरी मंज़िल चाहे तूँ मुझे मिले या ना मिले
आखें तेरी हैं झील सी और इन में डूबता जा रहा हूँ मैं
चलूँगा साथ तेरे उम्र भर अगर तुम एक बार हाँ कर दो मुझको
सारे ज़माने की खुशियां लेकर दे दूंगा मैं तुझको
क्यूंकि जान देकर भी प्यार को निभाना हमारा उसूल है
तूने जो दिया है मुझको वो दर्द ही सही पर मुझको कबूल है