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तेरा नाम लेकर अपनी तक़दीर लिख रहा हूँ

तेरा नाम लेकर अपनी तक़दीर लिख रहा हूँ

क्या तुम्हे भी खुद पर ये ऐतबार है कि नहीं

मैंने तो बिना सोचे समझे कर दी तेरे नाम ये जिंदगी

तुझे भी मुझसे प्यार है कि नहीं

जब कभी मैंने दिल से तुझे याद किया है

तो मैंने तुमको अपने आसपास ही पाया है

चलते चलते हर बार इन बेखुदी की राहों पर

मैंने तेरे आने का इंतज़ार किया है

कोशिश तो बहुत की है ज़माने ने मुझे गिराने की

एक तेरा साथ ही है जो मुझे थाम लेता है

तुम्हारी झुकती हुई नज़रें करती हैं इज़हार ए मोहब्बत

धन दौलत के ना सही पर हम दिल के अमीर हैं

तेरा नाम लेकर अपनी तक़दीर लिख रहा हूँ