
तेरी झुकती हुई पलकों पर अपना ठिकाना बना लूंगा मैं
शायद मेरे इस तड़पते हुए दिल को कुछ तो करार आ जाएगा
अकेला भी गिर कर संभल सकता हूँ मैं लेकिन
तुम्हारे बगैर ये जिंदगी एक सजा सी लगती है
तेरे गोर-गोर गालों को छूकर ये शाम हसीन कर लूंगा
जाओगे मुझसे बच कर तुम कहाँ मेरे मेहबूब
तेरी इन गलियों में मेरी मोहब्बत बस्ती है
तुझे देख लूँ तो मुझको करार आ जाए
मेरे ये प्यार भरे नग्मे मैं तुमको सुनना चाहता हूँ
तेरी हर सांस पर मैं अपना नाम लिखना चाहता हूँ
ये प्यार क्या चीज़ है ये तुझको बताना चाहता हूँ मैं
दिल क्या जब किसी को किसी से प्यार हो जाये
ना जाने कब ये दिल किसी से मिलने को बेकरार हो जाए
तेरे इश्क़ के दरवाज़े पर मेरी मोहब्बत तेरा इंतज़ार कर रही है
तुझसे इजाजत मांग कर हमारी मोहब्बत का एक हसीन अफसाना बना लूंगा मैं
तेरी झुकती हुई पलकों पर अपना ठिकाना बना लूंगा मैं
We offer poem and lyrics writing services for all your needs: personal or professional in English and Hindi. To avail the service, please contact by email: rajeevkharb_2007@rediffmail.com




