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तेरी तलाश में भटकता हूँ मैं दरबदर

तेरी तलाश में भटकता हूँ मैं दरबदर

कभी किसी राह में कभी किसी मोड़ पर

पूछता हूँ मैं तेरा पता इन पागल हवाओं से

बिखरी हुई है खुश्बू तेरी इन फ़िज़ाओं में  

मासूम है चेहरा तेरा ख़ुदा की मेहरबानी है तुझपर

तुम यूँ ना हँसो तड़पने पर मेरे

दिल ने मेरे तुझसे ही प्यार किया है

वफ़ा की राह पर एक बार आजमां कर तो देखो

रहूँगा साथ तेरे उम्र भर के लिए हर हाल में

ये पर्दा जो कर लिया है तुमने हमसे

तो बताओ कैसे हमारे नैनो की मुलाकात होगी

रोको मत तुम अपने दिल के जज्बातों को

सुलझा दूंगा मैं हर उलझन तेरी जिंदगी की

ज़रा अपने रुख से आँचल उठा कर तो देखो

अपना निगाहे करम हम पर भी कर दो कभी

किसी दिन तुम जरा मुस्कुरा कर भी देखो हमको

कहीं ऐसा ना हो हम चले जाये तेरी महफ़िल से

होकर रुस्वा तेरी बेरुखी और तेरे सितम से

तुम्हे नहीं मिलेगा कहीं मेरे जैसा हमसफ़र

तेरी तलाश में भटकता हूँ मैं दरबदर