तेरे आने की उम्मीद है मुझे इसलिए घर का दरवाज़ा खुला रखते हैं
जब से तुम गए हो तब से ये घर पहले जैसा नहीं रहा मेरे हमदम
कभी मेरे ख्याल बनते हैं तो कभी बन कर बिगड़ जाते हैं कसम से
ना जाने क्यों एक अजीब सी बेकरारी सी रहती है मेरे सीने में
सच कहता हूँ कि क्या ख़ाक मज़ा है इस तरह से जीने में
ऐसा नहीं है कि पहले कोई आकर नहीं गया मेरी इस दुनिया से
पर तेरा जाना अब भी मैं भुला नहीं पाया हूँ तुम ही बताओ कि मैं क्या करूँ
दिल के एक कोने से तुम्हारी याद जैसे पुरे जिस्म में उतरती है
शायद ख्वाब में तुमसे मुलाकात हो इसलिए हम खुद को सुला रखते हैं
तेरे आने की उम्मीद है मुझे इसलिए घर का दरवाज़ा खुला रखते हैं
कागज़ और कलम यूँ तो हमने बरसों से उठा रखी है
पर आजतक कोई प्रेम-गीत मैं लिख नहीं पाया हूँ
वैसे तो कमी नहीं है तुम्हारे पास अदाओं की
पर मैं तो तुमसे एक भी अदा अब तक ना सीख पाया हूँ
कवि बनकर ही शायद मैं तुमसे मिल तो लेता हूँ
हकीकत में तो तुम दूर बहुत हो मेरी पहुँच से
कल शाम फिर से हवाओं में तेरी प्यारी सी खुश्बू फैली थी
ऐसे लगा जैसे की तुम मेरे आस-पास ही हो
तुमसे मिलूँ तो आँखें मेरी नम ही रहें तो अच्छा है
इसलिए हम हरदम इस ज़ख़्मी दिल को रुला रखते हैं
तेरे आने की उम्मीद है मुझे इसलिए घर का दरवाज़ा खुला रखते हैं
अबकी बहार में मुझको फूल नसीब होंगे या फिर कांटे
ये तो मैं अभी से नहीं बता सकता मेरे प्यारे दोस्तों
सुना है की फूल तो सारे तेरी महफ़िल में चले गए
बस ये कांटे ही तो है जो मेरे हिस्से में आ गए
अब तो हालात ऐसे हैं कि फूलों से ज़ख्म खाते हैं
कांटे फिर भी हमदम से लगते हैं अब तो मुझको
इस प्यार को मैं क्या नाम दूँ ये तो मैं नहीं जानता
तेरी चाहत कि खुश्बू मुझे हर तरफ से आती है
तेरी पायल कि झंकार भी मुझे हर वक़्त सुनाई देती है
मुझे तो यक़ीन है कि जल्दी ही होगी हमारी प्यारी सी मुलाकात
मिलन तो कभी हो ना सका हमारा हम तो बस जुदाई का स्वाद ही चखते हैं
तेरे आने की उम्मीद है मुझे इसलिए घर का दरवाज़ा खुला रखते हैं
प्यार भरी बातें तेरी मुझे बेचैन करती हैं तुझसे मिलने को
मीठी-मीठी बातें तेरी रोज़ तड़पाती हैं मेरे आशिक़ दिल को
ना भूख लगे ना प्यास लगे और ना ही नींद मुझे आती है
ना जाने जाने के बाद ये तन्हाई क्यूँ खुद-बखुद चली आती है
कभी-कभी ये सोचता हूँ कि हार मान लूँ और तुझको छोड़ दूँ
पर शायद मेरे लिए ये कभी मुमकिन नहीं होगा
हर जतन कर डाला मैंने तो तुझे पाने का
पर शायद तुमको तो कुछ ज़्यादा ही डर है ज़माने का
ज़माने का क्या है ये तो जो भी कहना है कह कर रह जायेगा
पर लोगों की खातिर मेरे प्यार तो तूँ ना रुस्वा कर
जब मैं कहीं दूर चला जाऊंगा तो रोया करोगी और पछताओगी
भले ही हम हैं बर्बाद पर तेरी सलामती की हरदम दुआ रखते हैं
तेरे आने की उम्मीद है मुझे इसलिए घर का दरवाज़ा खुला रखते हैं
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