तेरे इंतज़ार की हद हो गयी ना जाने तुम कब आओगे
कह कर तो गए थे कि बस हम अभी आते हैं
हम तो आज भी वहीं पर खड़े हैं दिल थाम कर
जहाँ तुमसे मिले थे हसीन वादियों में
गले मैं मेरी डाला था तुमने अपनी बाँहों का हार
और ये भी कहा था करती हो तुम भी हमसे प्यार
साथ मिलकर हमने कुछ कस्मे भी खायी थी
कुछ वादे भी किये थे हमने उस मुलाकात में
अब ना जाने तुम कहाँ चली गयी हो
क्या हुआ अब उन कस्मों का और वादों का
ज़िन्दगी अब गुजर रही है तन्हाई के आगोश में
इस से पहले कि मैं तुम्हे आज बेवफा करार दे दूँ
या तो तुम खुद चली आओ मेरे पास
या फिर अपना पता दे दो मुझको
तुमने तो मेरा साथ छोड़ दिया लगता है
बीच मझदार में तुफानो भरी राह में
कहीं ऐसा ना हो अब कि
ये इश्क़ हमारा बस एक दास्तान बन कर रह जाये
दिल के आइने में ही देख लेता हूँ तस्वीर यार की
तुम बिन अब कैसे जिया जायेगा तुम ही बताओ
अगर साथ निभाना ही नहीं था तो दिल क्यों लगाया
अगर तुमको लोट कर ही नहीं आना था
तो फिर हमसे इतना इंतज़ार क्यों कराया
आजकल हम कुछ यूँ तेरे इश्क़ में घायल रहते हैं
ये दीवाने ज़माने भर के हमको पागल कहते हैं
ज़ख्म दिए हैं जो तुमने मेरे दिल पर
तो दवा भी अब तुमको ही करनी पड़ेगी
क्या बिगाड़ा था मेरी मासूम मोहब्बत ने तुम्हारा
लेना पड़ रहा है आज मुझको बेगानों से सहारा
किसी ने ये बिलकुल ठीक ही कहा है कि
इश्क़ किसी को कभी कहीं का नहीं छोड़ता
कोशिश तो मैं भी बहुत करता हूँ तुझको भुलाने की
पर शायद ये मेरे लिए ये अब मुमकिन नहीं
तेरे बगैर मैं खुद को नहीं संभाल सकता
तुझको पाने की खातिर करता हूँ दिन रात सजदा
अब तो जान भी जाने को है मेरी शायद
इश्क़ के सफर में अब और मुझको कितना तड़पाओगे
तेरे इंतज़ार की हद हो गयी ना जाने तुम कब आओगे
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